JAI GURU GEETA GOPAL

गुरुर्देवो गुरुर्धर्मो गुरौ निष्ठा परं तपः। गुरोः परतरं नास्ति त्रिवारं कथयामि ते ।। भगवान शिवजी कहते हैं - "गुरु ही देव हैं, गुरु ही धर्म हैं, गुरु में निष्ठा ही परम तप है। गुरु से अधिक और कुछ नहीं है। यह मैं तीन बार कहता हूँ।" (श्री गुरुगीता श्लोक 152)........... हरेर्नाम हरेर्नाम हरेर्नामैव केवलम ! कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिरन्यथा !! "इस ब्लॉग में जो भी इसमें अच्छा लगे वो मेरे गुरू ब्रह्मलीन स्वामी कल्याण देव जी का प्रसाद है, और जो भी बुरा लगे वो मेरी न्यूनता है" मनीष कौशल

Friday, March 8, 2019

जीवन जीने की राह (Jeevan Jeene Ki Rah3)

›
अपने जीवन व स्वभाव में गहराई उतारें नदी को शांत होने के लिए गहराई चाहिए। जहां वह बहुत गहरी होती है, वहां वह बिल्कुल शांत नज़र आती है। हम...
‹
›
Home
View web version

About Me

Jai Guru Geeta Gopal
View my complete profile
Powered by Blogger.